गायत्री , सावित्री ( Gayatri, Savitri )

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mayanknikhil
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गायत्री , सावित्री ( Gayatri, Savitri )

Post by mayanknikhil » 28 Dec 2018, 14:48

ब्रह्माजी के दो प्रत्नियाँ थीं । प्रथम गायत्री दूसरी सावित्री। इसे अलंकारिक प्रतिपादन में ज्ञान चेतना और पदार्थ सम्पदा कहा जा सकता है।

इनमें एक परा प्रकृति है, दूसरी अपरा । परा प्रकृति के अन्तर्गत मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार-अहंकार चतुष्टय, ऋतम्भरा प्रज्ञा आदि का ज्ञान क्षेत्र आता है ।
दूसरी पत्नी सावित्री । इसे अपरा प्रकृति, पदार्थ चेतना, जड़ प्रकृति कहा जाता है । पदार्थों की समस्त हलचलें-गतिविधियाँ उसी पर निर्भर हैं ।

परमाणुओं की भ्रमणकारी, रसायनों की प्रभावशीलता, विद्युत ताप, प्रकाश, चुम्बकत्व, ईश्वर आदि उसी के भाग हैं। पदार्थ विज्ञान इन्हीं साधनों को काम में लाकर अगणित आविष्कार करने और सुविधा साधन उत्पन्न करने में लगा हुआ है।
इसी प्रकृति को सावित्री कहते हैं। कुण्डलिनी इसी दूसरी शक्ति का नाम है।

दूसरी शक्ति सावित्री-पदार्थ शक्ति, क्रियाशीलता इस अपरा प्रकृति से ही प्राणियों को शरीर संचालन होता है और संसार की प्रगति चक्र चलता है।
शरीर में श्वास-प्रश्वास, रक्त-संचार, निद्रा-जागृति, पाचन-विसर्जन, ऊष्मा-ऊर्जा, विद्युत प्रवाह अगणित क्रियाकलाप काया के क्षेत्र में चलते हैं ।

Nitin Tiwari
हा सरस्वति भि उनकि पत्नि थी
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जाय गुरु देव
मयंक

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