बैठने का आसन : Seating seat

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mayanknikhil
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India

बैठने का आसन : Seating seat

Post by mayanknikhil » 21 Dec 2018, 17:15

बैठने का आसन : Seating seat

पत्थर या शिला पर बिना कोई आसन बिछाए कभी जपादि नहीं करना चाहिए। सबसे अच्छा यह है कि काठ के पट्टे पर ऊनी वस्त्र , कंबल या मृगचर्म बिछाकर ,उस पर बैठकर जप करना चाहिए।
यदि काठ का पट्टा उपलब्ध न हो तो ऊनी वस्त्र या मृगचर्म बिछाकर एवं उस पर आसीन होकर प्रयोगात्मक मंत्र का जप करना चाहिए।

मंत्र - विशारदों का कथन है कि बांस का आसन व्याधि व दरिद्रता देता है ,पत्थर का आसन रोगकारक है ,धरती का आसन दुःखों का अनुभव कराता है ,काष्ठ का आसन दुर्भाग्य लाता है ,
तिनकों का आसन यश हा ह्लास करता है एवं पत्रों का आसन चित्त - विक्षेप कराता हैं ।
कपास , कंबल , व्याघ्र व मृगचर्म का आसन ज्ञान , सिद्धि व सौभाग्य प्राप्त कराता है। काले मृगचर्म का आसन ज्ञान व सिद्धि प्राप्त कराता है। व्याघ्रचर्म का आसन मोक्ष व लक्ष्मी प्राप्त कराता है।
रेशम का आसन पुष्टि कराता है , कंबल का आसन दुःखनाश करता है तथा कई रंगों के कंबल का आसन सर्वार्थसिद्धि देने वाला होता हैं ।


जाय गुरु देव
मयंक

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